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ग्लोबल इन्वेस्टर कैसे बनें? अमेरिकी शेयर बाजार (NYSE & NASDAQ) में निवेश की पूरी जानकारी।

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आज के इस दौर में जब हम वैश्विक अर्थव्यवस्था की बात करते हैं, तो हमारे सामने सबसे पहला नाम अमेरिका का आता है। क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके हाथ में जो iPhone है, जिस Windows लैपटॉप पर आप काम करते हैं, जिस Google पर आप जानकारी खोजते हैं और जिस Amazon से आप सामान मंगवाते हैं - ये सभी कंपनियां अमेरिका की हैं। एक भारतीय होने के नाते, हम केवल इन सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहक बनकर क्यों रहें? हम इनके Shareholder क्यों नहीं बन सकते? आज के इस महा-लेख में हम इसी विषय पर बात करेंगे कि कैसे एक आम भारतीय नागरिक कानूनी रूप से न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) और नैस्डैक (NASDAQ) में निवेश कर सकता है। यह लेख आपकी वित्तीय यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। 1. अंतरराष्ट्रीय निवेश की आवश्यकता : केवल भारत में निवेश करना जोखिम भरा क्यों है? (Full Detail) - ज्यादातर भारतीय निवेशक अपनी पूरी जमा-पूंजी केवल भारतीय शेयर बाजार (NSE/BSE) में ही लगा देते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों की भाषा में इसे 'होम बायस' (Home Bias) कहा जाता है। सुनने में यह देशभक्ति जैसा लग सकता है, लेकिन निवेश की...

घर की सजावट में नए ट्रेंड और रचनात्मक आइडियाज़-बिल्कुल देसी अंदाज़ में।

घर की सजावट में नए ट्रेंड और रचनात्मक आइडियाज़-बिल्कुल देसी अंदाज़ में।

नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करेंगे एक ऐसे विषय पर जो हम सबके दिल के बहुत करीब है-हमारा "घर"। घर सिर्फ ईंट-पत्थर से बनी चार दीवारें नहीं होतीं, यह वो जगह है जहाँ हम दिन भर की थकान के बाद सुकून की साँस लेते हैं। यह वो कोना है जहाँ हमारी यादें बनती हैं, बच्चे बड़े होते हैं, और परिवार एक साथ हँसता-खेलता है। अक्सर हम पत्रिकाओं में या इंटरनेट पर आलीशान घरों की तस्वीरें देखते हैं और सोचते हैं कि काश हमारा घर भी ऐसा होता। लेकिन फिर बजट का ख्याल आता है, या फिर लगता है कि इतनी सजावट को मेंटेन कौन करेगा? यहीं पर हम गलती कर जाते हैं। घर को सुंदर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने की ज़रूरत नहीं है, ज़रूरत है तो बस थोड़ी सी समझदारी, थोड़ी सी रचनात्मकता और हमारे अपने देसी जुगाड़ की।

इस ब्लॉग में, मैं आपको कोई भारी-भरकम इंटीरियर डिज़ाइनिंग के नियम नहीं सिखाऊँगा। हम बात करेंगे सीधी, सरल और व्यावहारिक बातों की, जिन्हें आप और मैं, अपने मध्यम वर्गीय भारतीय घरों में आसानी से अपना सकते हैं। चाहे आप किराए के मकान में रहते हों या आपके पास अपना खुद का घर हो, सजावट का असली मज़ा तब है जब उसमें आपकी अपनी झलक दिखाई दे। तो चलिए, एक कप चाय हाथ में लीजिये और इत्मीनान से पढिये कि कैसे हम अपने आशियाने को एक नया और तरोताज़ा रूप दे सकते हैं, वो भी बिना जेब पर भारी बोझ डाले।

सबसे पहले सजावट की शुरुआत करने से भी पहले, एक ज़रूरी बात समझ लेना बहुत आवश्यक है। सजावट का मतलब कबाड़ इकट्ठा करना नहीं है। हम भारतीय अक्सर भावनाओं में बहकर चीज़ें फेंकते नहीं हैं। 'ये डिब्बा बाद में काम आएगा', 'ये पुरानी कुर्सी ठीक करवा लेंगे' इसी चक्कर में घर भर जाता है। सजावट का पहला नियम है-छंटाई। जिसे अंग्रेज़ी में 'डिक्लटरिंग' कहते हैं, उसे हम देसी भाषा में 'सफाई अभियान' कह सकते हैं। घर को सुंदर दिखाने के लिए जगह का खुला होना ज़रूरी है। जो चीज़ें पिछले दो साल से इस्तेमाल नहीं हुईं, यकीन मानिए वो अगले दो साल भी इस्तेमाल नहीं होंगी। उन्हें किसी ज़रूरतमंद को दे दें या कबाड़ी को बेच दें। जब घर से फालतू सामान हटेगा, तभी नई सजावट के लिए जगह और ऊर्जा बनेगी।

अब बात करते हैं प्लानिंग और बजट की। बाज़ार जाकर जो दिखा वो खरीद लेना समझदारी नहीं है। इससे घर 'म्यूजियम' कम और 'दुकान' ज़्यादा लगने लगता है। हर कमरे की अपनी ज़रूरत होती है। बैठक (Living Room) में मेहमान आते हैं, तो वहाँ थोड़ी चमक-धमक और बैठने की अच्छी व्यवस्था चाहिए। बेडरूम में सुकून चाहिए, ताकि नींद अच्छी आए। रसोई में सब कुछ हाथ के नीचे चाहिए। इसलिए, पहले एक डायरी लें और लिखें कि किस कमरे में क्या कमी है। क्या दीवारें सूनी हैं? क्या रोशनी कम है? या फिर फर्नीचर पुराना हो गया है? बजट बनाना सबसे ज़रूरी है। अगर आप एक साथ पूरा घर सजाने निकलेंगे तो जेब खाली हो जाएगी और परिणाम भी शायद अच्छा न मिले। समझदारी इसमें है कि 'एक समय में एक कोना' या 'एक कमरा' पकड़ें। इससे आपका ध्यान भी केंद्रित रहेगा और खर्चा भी काबू में रहेगा।

रंगों का जादू और देसी कनेक्शन

रंगों का चुनाव घर की जान होता है। आजकल विदेशी ट्रेंड्स को देख कर लोग अक्सर पूरे घर को सफ़ेद या ग्रे (स्लेटी) करवा लेते हैं। ये अच्छा लगता है, लेकिन क्या ये हमारे भारतीय माहौल को सूट करता है? भारत रंगों का देश है। हमारी संस्कृति, हमारे त्योहार, हमारे कपड़े सब रंगीन हैं। इसलिए घर में रंगों से डरिए मत। हाँ, ये ज़रूरी है कि रंगों का सही तालमेल हो। अगर कमरा छोटा है, तो दीवारों पर हल्के रंग जैसे क्रीम, ऑफ-व्हाइट, हल्का पीला या आसमानी नीला ही अच्छा लगेगा। ये रंग रोशनी को सोखते नहीं बल्कि उसे रिफ्लेक्ट करते हैं, जिससे कमरा बड़ा और खुला-खुला लगता है।

लेकिन देसी तड़का लगाने के लिए आप एक दीवार को, जिसे हम 'एक्सेंट वॉल' कहते हैं, उसे गहरा रंग दे सकते हैं। सोचिए, एक दीवार पर गहरा ईंट जैसा लाल (टेराकोटा), शाही नीला (इंडिगो), या सरसों वाला पीला रंग हो, और बाकी तीन दीवारें शांत क्रीम कलर की हों। यह कंट्रास्ट कमरे में जान डाल देता है। अगर आप पेंट नहीं करवाना चाहते, तो वॉलपेपर एक सस्ता और सुंदर विकल्प है। आजकल बाज़ार में ईंटों के डिज़ाइन वाले, या भारतीय मोटिफ्स (जैसे हाथी, मोर, या मंडला आर्ट) वाले वॉलपेपर आसानी से मिल जाते हैं। और हाँ, छत को हमेशा सफ़ेद ही रखें, इससे छत ऊँची लगती है और कमरा हवादार महसूस होता है।

फर्नीचर की बात करें तो यहाँ हम अक्सर फंस जाते हैं। नया फर्नीचर बहुत महंगा है और पुराना फर्नीचर मज़बूत तो है पर देखने में पुराना लगता है। यहाँ काम आता है हमारा 'रीसायकल और रीयूज' का मंत्र। पुराने लकड़ी के सोफे या कुर्सियों को फेंकने की गलती न करें। पुरानी सागवान या शीशम की लकड़ी आज के ज़माने के प्लाईवुड या इंजीनियर वुड से सौ गुना बेहतर है। आप बस उन्हें सैंडपेपर से घिसवा कर नया वार्निश या पेंट करवा दें। अगर सोफे का कपड़ा फट गया है या रंग फीका पड़ गया है, तो सिर्फ कपड़ा बदलवा लें। आजकल जूट, खादी, या इकत प्रिंट वाले फैब्रिक बहुत ट्रेंड में हैं। ये न सिर्फ सस्ते पड़ते हैं बल्कि घर को एक बहुत ही क्लासिक और देसी लुक देते हैं।

अगर आपका घर छोटा है, तो भारी-भरकम फर्नीचर से बचें। ऐसे फर्नीचर चुनें जो 'मल्टी-पर्पस' हों। जैसे ऐसा दीवान जिसमें नीचे संदूक (storage) हो, या ऐसी टेबल जो ज़रूरत न होने पर फोल्ड हो जाए। छोटे घरों में ज़मीन खाली दिखनी चाहिए, इससे घर बड़ा लगता है। इसलिए ऐसे सोफे या कुर्सियां चुनें जिनके पैर (legs) दिखते हों, जो ज़मीन से थोड़े ऊपर हों। भारी स्कर्ट वाले सोफे जगह को भरा-भरा दिखाते हैं।

रोशनी: घर की आत्मा

लाइटिंग या रोशनी सजावट का वो हिस्सा है जिसे लोग सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ करते हैं, जबकि यही सबसे सस्ता तरीका है घर का मूड बदलने का। हमारे देसी घरों में अक्सर छत पर एक ट्यूबलाइट लगी होती है जो पूरे कमरे को एक जैसी, सपाट सफ़ेद रोशनी देती है। यह पढ़ने के लिए तो ठीक है, लेकिन शाम को सुकून के लिए नहीं। सजावट के लिए 'लेयर्ड लाइटिंग' का इस्तेमाल करें। इसका मतलब है अलग-अलग ऊँचाई और अलग-अलग तरह की लाइट्स।

सबसे पहले तो ट्यूबलाइट की जगह एलईडी बैटन या सीलिंग लाइट्स का इस्तेमाल करें। शाम के वक़्त के लिए 'वार्म व्हाइट' (पीली रोशनी) वाले बल्ब का प्रयोग करें। पीली रोशनी आँखों को चुभती नहीं है और घर को एक होटल जैसा आरामदायक अहसास देती है। कोनों में एक फ्लोर लैंप रखें, या टेबल पर एक छोटा लैंप। अगर बजट कम है, तो दिवाली वाली फेयरी लाइट्स (लड़ी) का इस्तेमाल साल भर क्यों नहीं कर सकते? एक काँच की खाली बोतल में लड़ी डाल दें और देखें कैसे वो एक सुंदर लैंप बन जाती है। पर्दों के पीछे छिपी हुई स्ट्रिप लाइट्स भी कमरे को जादुई बना सकती हैं। याद रखें, अंधेरे कोने घर में नकारात्मकता लाते हैं, इसलिए हर कोने को रोशन करें।

अब आते हैं दीवारों की सजावट पर। दीवारें आपकी कहानी कहनी चाहिए। बाज़ार से खरीदे गए महंगे पेंटिंग्स अच्छे लग सकते हैं, लेकिन उनमें वो बात नहीं जो आपके परिवार की तस्वीरों में है। एक दीवार पर 'फैमिली कोलाज' बनाएँ। इसमें दादा-दादी की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों से लेकर बच्चों की शरारतों वाली तस्वीरें तक लगाएँ। अलग-अलग आकार के फ्रेम्स का इस्तेमाल करें, लेकिन सभी फ्रेम्स का रंग एक जैसा (जैसे काला या लकड़ी का रंग) रखें ताकि एकरूपता बनी रहे।

देसी सजावट में भारतीय हस्तशिल्प (Handicrafts) का कोई मुकाबला नहीं है। अगर आप कहीं घूमने गए थे और वहाँ से कोई स्मृति-चिह्न लाए हैं, तो उसे सजाएं। मधुबनी पेंटिंग, वारली आर्ट, या राजस्थान की कठपुतलियाँ-ये सब हमारे घर को एक विशिष्ट पहचान देती हैं। एक और बहुत ही सुंदर और सस्ता आइडिया है-कपड़ों का इस्तेमाल। अगर आपके पास माँ की कोई पुरानी भारी साड़ी या दादी का कोई पुराना कढ़ाई वाला दुपट्टा है जो अब पहनने लायक नहीं रहा, तो उसे फ्रेम करवा कर दीवार पर टांगें। यह किसी भी महंगे आर्ट पीस से ज़्यादा सुंदर लगेगा और साथ ही बड़ों का आशीर्वाद भी बना रहेगा।

कपड़े और टेक्सचर: घर का पहनावा

जैसे हम कपड़े बदल कर अपना लुक बदलते हैं, वैसे ही घर के कपड़े (फर्निशिंग) बदल कर घर का लुक बदला जा सकता है। पर्दे, कुशन कवर, रग्स (दरी) और बेडशीट्स-ये वो चीज़ें हैं जो सबसे कम खर्च में सबसे बड़ा बदलाव लाती हैं। पर्दों के लिए दो परतें (layers) इस्तेमाल करना एक अच्छा विचार है। एक हल्का पारदर्शी पर्दा (sheer) जो दिन में रोशनी आने दे लेकिन धूप रोके, और एक मोटा पर्दा (blackout) जो रात को प्राइवेसी दे। रंगों के मामले में, अगर आपकी दीवारें हल्के रंग की हैं, तो पर्दे गहरे या प्रिंटेड हो सकते हैं। और अगर दीवारें डार्क हैं, तो पर्दे हल्के रखें।

कुशन या तकिये घर के 'ज्वैलरी' जैसे होते हैं। सोफे पर ढेर सारे रंग-बिरंगे कुशन रखें। अलग-अलग टेक्सचर के साथ खेलें — कोई सिल्क का, कोई जूट का, तो कोई कॉटन का। देसी ब्लॉक प्रिंट, अजरख, या कलमकारी वाले कुशन कवर बहुत ही सोबर और आर्टिस्टिक लगते हैं। फर्श के लिए, मखमली कालीन भारतीय मौसम (खासकर धूल-मिट्टी) के लिए हमेशा सही नहीं होते। उनकी जगह सूती दरियाँ (Dhurries) या जूट के रग्स इस्तेमाल करें। इन्हें धोना आसान होता है और ये गर्मियों में भी पैरों को ठंडक देते हैं।

रसोई और बाथरूम-ये दो ऐसी जगहें हैं जिन्हें हम अक्सर सजावट में भूल जाते हैं, जबकि इनका साफ और सुंदर होना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। रसोई (Kitchen) को सजाने का सबसे अच्छा तरीका है उसे व्यवस्थित रखना। मसालों के लिए एक जैसे डिब्बे (Jars) खरीदें। ज़रूरी नहीं कि वो काँच के महंगे जार हों, अच्छी क्वालिटी के प्लास्टिक के डिब्बे भी अगर एक ही आकार और रंग के हों, तो रसोई बहुत व्यवस्थित लगती है। ओपेन शेल्व्स (खुली अलमारियाँ) आजकल बहुत ट्रेंड में हैं। आप अपनी सुंदर क्रॉकरी या पीतल/तांबे के बर्तनों को छुपाने के बजाय उन्हें सजा कर रखें। रसोई में एक छोटा सा मनी प्लांट या धनिया-पुदीने का गमला रख दें, हरियाली देखकर खाना बनाने का मन भी खुश रहेगा।

बाथरूम के लिए भी वही नियम है-सादगी। बाथरूम में अक्सर छोटी-छोटी चीज़ें यहाँ-वहाँ बिखरी रहती हैं। एक छोटी ट्रे या टोकरी रखें जिसमें सारा सामान (साबुन, तेल, ब्रश) रखा हो। एक बड़ा आईना बाथरूम को बड़ा दिखाता है। अगर जगह है, तो वहाँ भी एक छोटा पौधा रखें जो नमी में पनप सके। खुशबू के लिए महंगे डिफ्यूज़र की जगह आप एक कटोरी में पोटपुर्सी (सूखे फूल) या फिर थोड़ा सा कपूर रख सकते हैं। कपूर न सिर्फ हवा साफ करता है बल्कि नकारात्मक ऊर्जा भी दूर करता है।

प्रकृति को घर लाएं: इंडोर प्लांट्स

आजकल कंक्रीट के जंगलों में रहते हुए हम प्रकृति से दूर हो गए हैं। घर में पौधे लगाना अब सिर्फ शौक नहीं, ज़रूरत बन गया है। पौधे न केवल घर की हवा को शुद्ध करते हैं, बल्कि वो घर में एक तरह की 'जीवंतता' (Lifeforce) लेकर आते हैं। और घबराइए मत, आपको गार्डनिंग एक्सपर्ट होने की ज़रूरत नहीं है। ऐसे पौधे चुनें जो भारतीय जलवायु में आसानी से चलते हैं और जिन्हें ज़्यादा नखरे नहीं दिखाने पड़ते।

मनी प्लांट तो हर घर का साथी है। इसे पानी में लगाएँ या मिट्टी में, यह हर जगह खुश रहता है। इसे ऊँची जगह या बुकशेल्फ़ पर रखें और इसकी लताओं को नीचे लटकने दें। स्नेक प्लांट (Snake Plant) और एलोवेरा (Aloe Vera) ऐसे पौधे हैं जो कम पानी और कम रोशनी में भी मजे से रहते हैं और हवा को सबसे ज़्यादा साफ़ करते हैं। एरेका पाम (Areca Palm) लिविंग रूम के कोनों के लिए बहुत अच्छा है, यह खाली कोने को भर देता है और बहुत रईस लुक देता है। पौधों को सजाने के लिए महंगे गमलों की ज़रूरत नहीं है। आप साधारण मिट्टी के गमलों को खुद पेंट कर सकते हैं। पुराने मग, बाल्टियाँ, या टिन के डिब्बों को पेंट करके उनमें पौधे लगाएँ-यह एक बेहतरीन DIY प्रोजेक्ट है और कचरा कम करने का तरीका भी।

देसी जुगाड़ और DIY (Do It Yourself)

खुद अपने हाथों से बनाई चीज़ों की बात ही कुछ और होती है। इसमें पैसा तो बचता ही है, साथ ही जो संतोष मिलता है वो अनमोल है। कुछ आसान आइडियाज़ जो आप वीकेंड पर ट्राई कर सकते हैं:
1. बोतलों की कलाकारी: खाली वाइन की बोतलें या सॉस की बोतलें फेंकने के बजाय, उन पर जूट की रस्सी लपेट दें या पेंट कर दें। इनमें आप फूल या लाइट्स लगा सकते हैं।
2. पुराने टायरों का ओटोमन: अगर आपके पास पुराना टायर है, तो उसे अच्छी तरह साफ करके उस पर रस्सी लपेट दें और ऊपर एक गद्दी रख दें। यह एक बेहतरीन बैठने का मोड़ा बन जाएगा।
3. साड़ियों का मेकओवर: पुरानी बनारसी या सिल्क साड़ियों से कुशन कवर, टेबल रनर, या यहाँ तक कि पर्दों के बॉर्डर भी बनाए जा सकते हैं।
4. सीढ़ी का शेल्फ: अगर घर में पुरानी लकड़ी की सीढ़ी है, तो उसे पेंट करके दीवार के सहारे खड़ा कर दें। उसके डंडों पर आप तौलिए, किताबें या छोटे पौधे टांग सकते हैं। यह बहुत ही आधुनिक और 'बोहेमियन' लुक देता है।

एक और महत्वपूर्ण पहलू है घर की खुशबू। एक सुंदर दिखने वाला घर अगर महक नहीं रहा है, तो अनुभव अधूरा है। भारतीय घरों में सदियों से खुशबू का महत्व रहा है। शाम के समय लोबान या गुग्गल जलाना न सिर्फ धार्मिक है, बल्कि यह मच्छरों को भगाता है और मन को शांत करता है। अगर आपको इसका धुआं पसंद नहीं, तो भीनी खुशबू वाली अगरबत्ती, ताजे मोगरे के फूल, या एसेंशियल ऑयल्स का इस्तेमाल करें। उबलते पानी में नींबू के छिलके, दालचीनी और लौंग डालकर धीमी आंच पर रखने से भी पूरा घर महक उठता है-यह सबसे सस्ता और प्राकृतिक रूम फ्रेशनर है।

आखिर में, सजावट को एक बोझ मत मानिए। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। घर एक दिन में नहीं बनता। धीरे-धीरे चीज़ें जोड़ते रहें। कभी एक पेंटिंग ले आए, कभी एक नया पौधा लगा दिया, कभी कुशन बदल दिए। घर को आपकी आदतों के अनुसार बदलना चाहिए, न कि आपको घर के अनुसार। अगर आपके घर में बच्चे हैं, तो बहुत नाज़ुक काँच की चीज़ें सजाने का कोई मतलब नहीं, चाहे वो कितनी भी सुंदर क्यों न हों। घर ऐसा होना चाहिए जहाँ बच्चे बेधड़क दौड़ सकें और बुजुर्ग आराम से चल सकें।

ट्रेंड्स आते-जाते रहेंगे। कभी मिनिमलिज्म का दौर आएगा, कभी मैक्सिमलिज्म का। लेकिन 'देसी अंदाज़' हमेशा सदाबहार रहता है क्योंकि यह हमारी जड़ों से जुड़ा है। इसमें गर्मी है, अपनापन है और स्वागत करने का भाव है। जब कोई आपके घर आए, तो उसे यह नहीं लगना चाहिए कि वो किसी शोरूम में आया है, उसे लगना चाहिए कि वो एक ऐसे घर में आया है जहाँ खुशियाँ बसती हैं, जहाँ लोगों के बीच प्यार है।

निष्कर्ष

तो दोस्तों, ये थे कुछ सरल और देसी तरीके अपने घर को सजाने के। याद रखिए, बजट कम होना रचनात्मकता में बाधा नहीं है, बल्कि यह तो हमें और ज़्यादा क्रिएटिव बनने का मौका देता है। अपनी पसंद और नापसंद पर भरोसा रखें। किसी और की नकल करने के बजाय, अपने दिल की सुनें।

शुरुआत छोटी करें। आज ही अपने घर के किसी एक कोने को चुनें-शायद वो आपकी कॉफी टेबल हो या बेडसाइड टेबल और उसे थोड़ा बदलने की कोशिश करें। फालतू सामान हटाएँ, एक छोटा सा पौधा रखें, या एक दीया जलाएँ। आप देखेंगे कि इस छोटे से बदलाव से ही आपको कितनी खुशी मिलेगी। अगर आपके पास भी कोई देसी जुगाड़ या सजावट का आइडिया है, तो उसे ज़रूर आज़माएँ। घर आपका कैनवास है, इसे अपने रंगों से भर दीजिये।

क्या आप तैयार हैं अपने घर को नया रूप देने के लिए? अगर आपको किसी खास कमरे (जैसे सिर्फ किचन या बच्चों का कमरा) के लिए और गहरे सुझाव चाहिए, तो बेझिझक बताइये, मैं आपकी मदद के लिए यहाँ हूँ।

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